नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी गैस की कथित कमी के मुद्दे पर कांग्रेस सांसदों ने जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सांसद वेल के पास पहुंचकर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करने लगे। लगातार शोर-शराबे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने एक बार फिर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
‘नेता नहीं सुधरता तो सांसद भी नहीं सुधरेंगे’
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ संसद का समय बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनका नेता नहीं सुधरता है तो उनके सांसद भी नहीं सुधरेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का नेता संसद परिसर में ग्लास और थाली लेकर प्रदर्शन कर रहा है और नाटक कर रहा है। रिजिजू ने कहा कि इसी तरह की हरकतों की वजह से जनता कांग्रेस से नाराज है और इसी कारण पार्टी सत्ता में नहीं आ पा रही है।
‘कांग्रेस में अब कोई नेता नहीं जो समझा सके’
रिजिजू ने कहा कि वह यह बात बेहद दुखी मन से कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी में अब ऐसा कोई नेता नहीं बचा है जो अपने नेता को समझा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता के व्यवहार का असर पार्टी के अन्य सांसदों पर भी पड़ रहा है और उनका आचरण भी बिगड़ गया है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को शर्मसार करने वाला बताया।
‘अभी भी समय है, सुधर जाओ’
संसदीय कार्यमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा कि अभी भी समय है कि वे अपना रवैया बदल लें, अन्यथा जनता उन्हें सजा देगी।
कार्यवाही शुरू होते ही शुरू हुआ विपक्ष का विरोध
इससे पहले सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया। इसी दौरान कांग्रेस के सांसद अपने स्थानों पर खड़े होकर देश में एलपीजी गैस की कथित कमी का मुद्दा उठाने लगे। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देने की बात कहते हुए भी सुना गया।
ओम बिरला ने सांसदों से की मर्यादा बनाए रखने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामा कर रहे विपक्षी सांसदों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अक्सर सांसद यह शिकायत करते हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता, लेकिन जब उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है तो वे चर्चा करने के बजाय सदन में गतिरोध पैदा करते हैं, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नकाल के बाद सदस्य किसी भी मुद्दे को उठा सकते हैं। साथ ही उन्होंने सांसदों को यह भी याद दिलाया कि संसद के अंदर और संसद परिसर के बाहर उसकी पवित्रता, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
